गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद गिरी के खिलाफ वेव सिटी थाने में केस दर्ज किया गया है। उन पर भड़काऊ बयान देने और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पुलिस कमिश्नर और एसीपी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। मामला तब सामने आया जब यति नरसिंहानंद ने लोनी विधायक के समर्थन में एक बयान जारी किया, जिसके बाद थानाध्यक्ष सर्वेश कुमार पाल ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।
पहले भी विवादों में रहे हैं यति नरसिंहानंद
यति नरसिंहानंद पहले भी भड़काऊ भाषण देने और धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोपों का सामना कर चुके हैं। हाल ही में, लोनी में रामकथा के लिए निकाली गई कलश यात्रा को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें लोनी विधायक ने सरकार के खिलाफ बयान दिए थे। इसके बाद यति नरसिंहानंद ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर टिप्पणी की।
इसके अलावा, उन्होंने पुलिस आयुक्त अजय मिश्रा को लेकर भी बयान दिया और वीडियो जारी कर अन्न त्यागने की घोषणा की। यति ने कहा कि वह सोमवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय जाकर जल का त्याग करेंगे। पुलिस ने उनके इस वीडियो को संज्ञान में लेते हुए शुक्रवार देर रात मुकदमा दर्ज किया।
नरसिंहानंद का बयान और पुलिस की प्रतिक्रिया
यति नरसिंहानंद ने मुकदमे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा और सोमवार को अकेले पुलिस ऑफिस जाएंगे। पुलिस का कहना है कि वीडियो के आधार पर जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी।
कौन हैं यति नरसिंहानंद?
ऐसा माना जाता है कि यति नरसिंहानंद सरस्वती का असली नाम दीपक त्यागी है। वह मेरठ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। 1989 में उच्च शिक्षा के लिए रूस गए और 1994 में डिग्री पूरी करने के बाद मास्को में बतौर इंजीनियर काम किया। कुछ महीनों बाद 1997 में अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए भारत लौट आए।
गुरु से दीक्षा लेने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर यति नरसिंहानंद रख लिया। अब वह खुद को दीपक त्यागी के नाम से बुलाना पसंद नहीं करते।
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